विनम्र स्वभाव, निश्छल मन, कोमल प्रवृत्ति और मनसा वाचा कर्मणा का सिद्धांत ये वे गुण हैं जो डॉ. जेएल खुराना को बाकियों से अलग करते थे. मन वचन और कर्म से एक तपोयोगी की तरह जीवन जीते रहे डॉ. खुराना ने अपने जीवन में कभी भी ऐश्वर्य और धन को महत्व नहीं दिया. जब सिरसा में बाल रोग के चिकित्सक न के बराबर थे तब डॉ. जेएल खुराना ने जगदेव सिंह चौक पर अपना अस्पताल बनाया. उनके हाथ की शफा ही थी कि उनके हाथों का दुलार पाकर ही बच्चे की आधी पीड़ा दूर हो जाती थी. पिछले साल के आखरी दिन 31 दिसंबर को उन्होंने आखरी सांस ली तो जैसे सिरसा के स्वास्थ्य जगत में एक सन्नाटा छा गया. सदैव मुस्कराते हुए रहने वाले डॉ. जेएल खुराना अनेक लोगों की आंखों में पानी छोड़कर चले गए. उनके द्वारा लगाया गया पौधा आज जरूर एक वटवृक्ष के रूप में खुराना अस्पताल के नाम से स्थापित है. उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए ही उनके पुत्र डॉ. आशीष खुराना बाल रोगों के प्रति समर्पित भाव से काम कर रहे हैं. ठीक अपने पिता जैसा ही स्वभाव और प्रकृति वाले डॉ. आशीष खुराना के हाथों में भी बच्चों के लिए एक खास शफा है. हजारों बच्चों को अपने उपचार से तंदुरुस्त करने वाले डॉ. आशीष खुराना को अपने काम से काफी संतोष मिलता है. उनके साथ ही डॉ. स्निग्धा खुराना, डॉ. अंजी खुराना और डॉ. अभिषेक भी इसी शहर में अपनी सेवाएं उपलब्ध करवा रहे हैं.
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शहर को बहुत याद आएंगे डॉ. जेएल खुराना...
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