शिक्षाप्रणाली में बदलाव की ज़रुरत - POSITIVE STORY
CAMSOL EDUCATION SIRSA
शिक्षाप्रणाली में बदलाव की ज़रुरत

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आज हर कोई बात करता है शिक्षा को बढ़ाने की पर क्या इस क्षेत्र  में बदलाव की ज़रुरत नहीं है?  मैं हैरान थी जब मुझे एक युनिवर्सिटी के स्टूडेंट ने ये बताया कि उन्हें असाइनमेंट जमा करवाने पड़ते हैं जिन्हे वो किसी से भी बनवा सकते हैं। वह स्टूडेंट परेशान भी था कि टीचर को इस बात से भी कोई फर्क नही पड़ रहा था कि वो उनके द्वारा दिए गए असाइनमेंट को खुद से बनाते है या किसी और की मदद लेते हैं। हैरानी की बात ये थी कि जो बच्चे असाइनमेंट को खुद बनाकर जमा करवाते है उन्हें उसमे लिखी किसी भी चिज़ के बारे में कोई जानकारी नही थी। मतलब की वो उस चिज़ को लिखने में अपना समय बर्बाद कर रहा हैं जिनके बारे में वो जानते भी नहीं हैं।
    मै यह सोचने पर मजबूर हूँ कि क्या सच में हम इस शिक्षाप्रणाली को बढ़ता हुआ देखना चाहते हैं? क्या सच में यह प्रणाली हमारे बच्चों के भविष्य को उजागर करेगी? समय की यह मांग है कि शिक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ हमें उसके स्तर को भी निखारने की ज़रुरत है। मै यह बिलकुल नही कह रही की असाइनमेंट वर्क देने जैसी एक्टिविटिज़ ग़लत है और इसे बंद कर देना चाहिए। मेरा मानना बस इतना है कि टिचर्स इस असाइनमेंट वर्क के सिस्टम को थोड़ा सा बेहतर बनाएं जैसे कि इसे किताबों तक सीमित ना रखकर थोड़ा-सा प्रेक्टिकल बनाएं और अगर यह संभव ना हो तो इसके जमा करवाने से पहले बच्चों से इसके बारे में कुछ सवाल-जवाब किए जाएं। इससे बच्चे हर असाइनमेंट को खुद बनाएंगे और कुछ भी लिखने से पहले उसके बारे मे पढ़ेंगे। जिससे यह समय की बर्बादी न होकर समझदारी का काम होगा। साथ ही टीचर्स और पेरेंटस् को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए की बच्चा जो भी काम करे वो उससे कुछ सीखे।
          आशा रानी

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