आमतौर पर स्कूल के नाम से केवल शिक्षा और कक्षाओं का नजारा ही आंखों के सामने घूमता है लेकिन हम जिस संस्थान की बात कर रहे हैं उसकी बात निराली है. शाह सतनाम जी गल्र्ज स्कूल उस संस्थान का नाम है जिसमें बच्चों को केवल शिक्षा तक ही सीमित नहीं रखा जाता बल्कि यहां बच्चों को मेडीटेशन, मानवता और दीन-हीन की मदद करने का भी पाठ पढ़ाया जाता है. प्री नर्सरी से लेकर 12वीं तक इस स्कूल में शिक्षा दी जाती है. स्कूल में नैतिक शिक्षा, चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाता है और खेलों में भी इस स्कूल के बच्चों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चार चांद लगाए हैं. हाल ही में स्केटिंग प्रतियोगिता में स्कूल की 60 छात्राओं ने बिना कोच के गोल्ड मेडल हासिल करके यह जता दिया कि उनका अभ्यास और जज्बा कितना मजबूत है. पूरे स्कूल में इंग्लिश स्पीकिंग एनवायरमेंट है और बच्चे अंग्रेजी में बात करते हैं. अंग्रेजी की शिक्षा बेशक है लेकिन बच्चों के संस्कार इतने अच्छे हैं कि अगर जन्मदिन भी हो तो पार्टी करने की बजाय वे गरीब बच्चों को किताबें भेंट करते हैं, दिव्यांग लोगों को खाना खिलाते हैं और निर्धन लोगों की मदद करते हैं. लगभग 90 लोगों का स्टाफ स्कूल में है और तकरीबन 1500 बच्चे यहां स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. शीला पूनिया स्वयं उच्च शिक्षित हैं और पिछले 25 साल से वे यहां हैं. डॉ. शीला पूनिया बताती हैं कि बच्चों में हर तरह की प्रतिभा होती है. हम उन्हें देखते हैं और जिस फील्ड में वे जाना चाहते हैं उसे उसी तरह से दीक्षित करते हैं. स्कूल में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि प्रदेशों के बच्चे भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. वे कहती हैं कि हर फील्ड में स्कूल के बच्चे जाएं, यही इच्छा रहती है और उसी के लिए प्रयासरत भी हैं.
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शिक्षा के साथ, मानवता का पाठ
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